Vikram and the Vampire; or, Tales of Hindu Devilry by Sir Richard Francis Burton

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‘The genius of Eastern nations,’ says an established and respectable authority, ‘was, from the earliest times, much turned towards invention and the love of fiction. The Indians, the Persians, and the Arabians, were all famous for their fables. Amongst the ancient Greeks we hear of the Ionian and Milesian tales, but they have now perished, and, from every account that we hear of them, appear to have been loose and indelicate.’ Similarly, the classical dictionaries define ‘Milesiæ fabulæ’ to be ‘licentious themes,’ ‘stories of an amatory or mirthful nature,’ or ‘ludicrous and indecent plays.’ M. Deriége seems indeed to confound them with the ‘Mœurs du Temps’ illustrated with artistic gouaches, when he says, ‘une de ces fables milésiennes, rehaussées de peintures, que la corruption romaine recherchait alors avec une folle ardeur.’

Vikram and the Vampire: Classic Hindu Tales of Adventure, Magic, and Romance by Richard F. Burton

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The Baital-Pachisi, or Twenty-five Tales of a Baital is the history of a huge Bat, Vampire, or Evil Spirit which inhabited and animated dead bodies. It is an old, and thoroughly Hindu, Legend composed in Sanskrit, and is the germ which culminated in the Arabian Nights, and which inspired the “Golden Ass” of Apuleius, Boccacio’s “Decamerone,” the “Pentamerone,” and all that class of facetious fictitious literature.

Vikram and Vetal by Richard Francis Burton

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The all-time loved collection of Hindu tales of Adventure, Magic, and Romance. Top popular series of Vikrarm-Betal tales now in English

Vikramshila Ka Itihas by Thakur Parshuram Brahmavadi

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पुरातत्त्व की खोज और पहचान विश्‍व इतिहास को आश्‍चर्यचकित कर सकते हैं। विक्रमशिला के पुरावशेषों का ऐतिहासिक, भौगोलिक, भूगार्भिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन करने से अरबों वर्षों का इतिहास सामने आया है और जो हड़प्पा, सिंधु, सुमेरु, सुर, असुर, देव गंधर्व, नाग, कोलविध्वंशी, शिव, इंद्र, राम, कृष्ण, आर्या देवी सभ्यताओं एवं संस्कृति के साथ-साथ विश्‍व विकास के मूल इतिहास का प्रामाणिक साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं।
विक्रमशिला खुदाई स्थल से प्राप्‍त पुरातात्त्विक सामग्रियों में कांस्य मूर्तियाँ, मृदभांड, स्तंभ, मुहरें, मृण-मूर्तियाँ आदि के अतिरिक्‍त हजारों किस्म की प्रस्तर कला, भवन निर्माण कला, लोहा, ताँबा, सोना, चाँदी, विभिन्न पशुओं की अस्थियाँ, नवरत्‍न की माला, मातृदेवी, शिवयोगी के विभिन्न रूप, विष्णु, वरुण, ब्रह्मा, कृष्ण, राम, संदीपमुनि, आदिबुद्ध, तारा, बृहस्पति, पुरुरण, उर्वशी आदि की प्रतिमाएँ मिली हैं, जो हिमयुग की सभ्यता-संस्कृति से लेकर वैदिक युग, रामायण युग, महाभारत युग, सिद्धार्थ-बुद्ध तक के साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं। विक्रमादित्य की राजधानी का ऐतिहासिक दस्तावेज ‘बत्तीसी आसन’ अभी भी यहाँ अवशेष के रूप में मौजूद है।
प्रस्तुत ग्रंथ ‘विक्रमशिला का पुरातात्त्विक इतिहास’ प्राचीन बिहार की सभ्यता-संस्कृति का इतिहास ही नहीं है, बल्कि विश्‍व इतिहास को भी एक नई दृष्‍टि देने में समर्थ है।

Viksit Bihar Ki Khoj   by  nitish Kumar

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सन‍् 1957 में प्रधानमंत्री नेहरू ने श्री अटल बिहारी वाजपेयी के संदर्भ में लोकसभा में कहा था-‘ ‘ बोलने के लिए वाणी की जरूरत होती है, किंतु मौन के लिए वाणी और विवेक दोनों की जरूरत पड़ती है। ” बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के विषय में भी शायद पंडित नेहरू का यह वाक्यांश सटीक बैठता है।
मुख्यमंत्री नीतीश बाबू चाहे प्रतिपक्ष में रहे या पक्ष में, सदन के एक-एक पल का उपयोग किया, ताकि संसदीय जनतंत्र मजबूत हो एवं जन- भागीदारी का यह मुखर मंच अपने मकसद में कामयाब हो। वे कर्पूरी ठाकुर की राजनीति के कायल रहे हैं। उन्होंने राजनीति में सिद्धांतों और मूल्यों की पैरवी की और इन्हें सही मायनों में अपनाया भी। यह कहना अतिशयोक्‍ति नहीं होगी कि उनके कार्यकाल में बिहार राज्य का कायाकल्प हो गया है।
प्रस्तुत पुस्तक में नीतीश बाबू के बहुआयामी व्यक्‍तित्व एवं कार्यों का विवेचन किया गया है। एक राजनेता के रूप में वे अपनी वाणी से कुछ न कहकर अपना उत्तर रचनात्मक कार्यो के रूप में देते हैं। उनकी मान्यता है कि सुशासन का लाभ अंतिम व्यक्‍ति तक पहुँचे।
राजनीति में शुचिता और पारदर्शिता का प्रमाण देनेवाले इन लेखों से आम आदमी का राजनीतिज्ञों में और विकास के कामों में विश्‍वास बढेगा।

VILLAGE INDUSTRIES by M. K. GANDHI

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“The idea behind the village industries scheme is that we should look to the villages for the supply of our daily needs and that, when we find that some needs are not so supplied, we should see whether with a little trouble and organization, they cannot be profitably supplied by the villagers. In estimating the profit, we should think of the villager, not of ourselves. It may be that, in the initial stages, we might have to pay a little more than the ordinary price and get an inferior article in the bargain. Things will improve, if we will interest ourselves in the supplier of our needs and insist on his doing better and take the trouble of helping to do better.” —from the Book

Village Swaraj  by M. K. GANDHI

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According to Gandhiji, ideal society is a Stateless democracy, the state of enlightened anarchy where social life has become so perfect that it is self-regulated. “In the ideal state, there is no political power because there is no State.” Gandhiji believed that perfect realization of an ideal is impossible. However “the ideal is like Euclid’s line that is one without breadth but no one has so far been able to draw it and never will.
Village Swaraj as conceived by Gandhiji is thus a genuine and virile democracy which offers a potent cure for many of the political ills that mark the present political systems. Such a pattern of decentralized genuine democracy will have a message for the whole of humanity.

Villette by Charlotte Brontë

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First published in the year 1853, celebrated Victorian romantic novelist Charlotte Brontë’s present book ‘Villette’ is about a girl named Lucy Snowe who, after an unspecified family disaster, travels from her native England to the fictional French-speaking city of Villette to teach at a girls’ school, where she is drawn into adventure and romance.

Vilom Shabdkosh by Sant Sameer

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समान्य धारणा है कि ‘विलोम शब्दकोश’ केवल उन विद्यार्थियों के काम के होते हैं, जिन्हें भाँति-भाँति की परीक्षाएँ देनी होती हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि हिंदी के लिए या हिंदी में काम करनेवाले प्रायः सभी तरह के लोगों को कभी-न-कभी विलोम शब्दों को जानने-समझने की आवश्यकता होती ही है। इस अर्थ में यह कोश विद्यार्थियों, अध्यापकों, लेखकों, पत्रकारों, बुद्धजीवियों आदि सबका हितसाधक बनेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।
इस कोश की एक विशिष्टता यह है कि इसमें संगृहीत सभी शब्द वणोर्ं के सुचिंतित क्रम का ध्यान रखते हुए सँजोए गए हैं। इसके अलावा, विद्यार्थियों में हिंदी-वर्णमाला की सामान्य समझ विकसित करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ण की मूल विशेषता को भी संक्षिप्त में बताया गया है।
ऐसा भी नहीं है कि यह पुस्तक
सिर्फ ‘विलोम शब्दकोश’ भर ही है, बल्कि परिशिष्ट के रूप में इसकी उपयोगिता को विस्तार देने का प्रयत्न किया गया है। विलोम शब्दों पर आधारित पदबंध इसकी रोचकता और उपयोगिता को और बढ़ाते हैं।
भाषा को सुदृढ और समृद्ध करने के लिए एक आवश्यक पुस्तक।

Vinamrata by Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’

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विनम्रता मानव जीवन में सबसे शक्तिशाली और महत्त्वपूर्ण गुणों में से एक है। विनम्र होना विश्वास बनाने में मदद करता है और सीखने की सुविधा देता है, जो नेतृत्व और व्यक्तिगत विकास के प्रमुख पहलू हैं।
नम्रता वस्तुतः वह भावना या दृष्टिकोण है, जहाँ आप स्वयं को विशेष महत्त्व न देकर अभिमान रहित, निस्स्वार्थ भाव से दूसरों की भलाई के विषय में तत्पर रहते हैं। पहली नजर में विनम्रता एक नकारात्मक गुण की तरह लग सकती है—एक ताकत के बजाय कमजोरी के संकेत की तरह, परंतु वास्तव में विनम्रता एक ऐसा गुण है, जो आपको दूसरों की अपेक्षा श्रेष्ठ स्थापित करते हुए आपके जीवन को बहुत आगे ले जाएगी। आइए, इसे दूसरे तरीके से देखें। जिस व्यक्ति में नम्रता का अभाव होता है, वह अपने बारे में सोचता है और खुद को दूसरों से ऊँचा और बेहतर देखता है। ऐसे व्यक्ति से सब बचना चाहते हैं।
हम जिस अहंकार के युग में रहते हैं, उसमें विनम्रता की शक्ति छिपी हुई है, उसे व्यक्तित्व का हिस्सा बनाना अत्यंत आवश्यक है। विनम्रता के लिए अत्यधिक आत्मज्ञान, आत्मनियंत्रण और आत्मसम्मान की आवश्यकता होती है।
चाहे व्यक्ति हो, संगठन हो या संस्था हो, विनम्रता से ही शिखर तक पहुँचा जा सकता है। इसलिए विनम्रता को सफलता का मूलमंत्र भी कहा गया है।
अगर नेतृत्व विनम्र है तो सब लोगों को साथ लेकर चलने की कला का स्वतः ही विकास हो जाता है। जरूरत पड़ने पर सब की सलाह और सहयोग लेने की क्षमता भी विकसित हो जाती है।

Vinayak Sahasra Siddhai by Rajendra Mohan Sharma

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भारतीय जनमानस में विनायक को लेकर जैसी श्रद्धा व विश्वास है, वही उसे लोक नायक बनाने के लिए पर्याप्त है। वह सामाजिक दृष्टि से रूढि़ग्रस्त समाज को दिशा देता है और सामाजिक सरोकारों से जुड़कर लोक-कल्याण को सर्वोपरि मानता है। भारत में आर्यावर्त के समय से ही या यों कहें, उससे पूर्व से ही गणेश, गणपति, गणनायक एक ऐसे नायक रहे हैं, जो अपने श्रेष्ठ कार्यों के कारण घर-घर में वंदनीय रहे। मानव समाज उन्हीं की वंदना करता है, जो सेवा के बदले कोई अपेक्षा नहीं करते।
विघ्नहर्ता-मंगलमूर्ति-लंबोदर गणेशजी पर केंद्रित इस औपन्यासिक कृति का लेखन इसी वर्ष में पूर्ण हुआ, जिसका आधार मार्कंडेयपुराण, अग्निपुराण, शिवपुराण और गणेशपुराण सहित अनेक संदर्भ ग्रंथों का अध्ययन है।
विनायक एक सामान्य विद्यार्थी से लेकर समाज के पथ-प्रदर्शक के रूप में पल-पल पर संघर्ष करता है और प्रतिगामी शक्तियों से मुकाबला करता है। विनायक ने हर उस घटना, कार्य और यात्रा को सामाजिक सरोकारों के साथ जोड़ा है, जिनसे वह गुजरता है। अपने मित्रों पर उसे अटूट विश्वास है। उसके पास अद्भुत संगठन क्षमता है। विनायक एक साधारण नायक से महानायक तक की यात्रा तय करता है; लेकिन मानव होने के नाते सारे गुण-अवगुण अपने भीतर समेटे हुए है। ‘विनायक त्रयी’ का यह भाग ‘विनायक सहस्र सिद्धै’ एक ऐसा ही उपन्यास है।
अत्यंत रोचक व पठनीय उपन्यास।