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Amir-ud-Daula Public Library

अमीर-उद-दौला सार्वजनिक पुस्तकालय छात्र उत्कृष्टता के लिए डिजिटल सामग्री की उच्च गुणवत्ता की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है।

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Amir-ud-Daula Public Library

Featured Digital Library Content

There are various types of digital content on Amir-ud-Daula Public Library. Explore our featured content in various document categories.

Jeevan Gita by Devmuni Shukla

SKU: 9788177211115
श्रीमद‍्भगवद‍्गीता भारतीय वाड‍्मय का पवित्र एवं अत्यंत लोकप्रिय ग्रंथ है। विश्‍व की अनेक भाषाओं में इसका अनुवाद हो चुका है; इसकी अनेक टीका एवं समीक्षाएँ लिखी गई हैं। आदि शंकराचार्य से लेकर विनोबा भावे तक अनेक विद्वानों और संत-महात्माओं ने गीता पर भाष्य लिखे। लोकमान्य तिलक ने गीता को निष्काम कर्मयोग का आधार-ग्रंथ प्रतिपादित किया। गीता का धर्म कर्तव्य का द्योतक है। इसके अनुसार शरीर, इंद्रिय, मन और बुद्धि सभी के कर्तव्य निश्‍च‌ित हैं। मानव शरीर जीवात्मा का परिधान मात्र है। इसमें निष्काम कर्म और संपूर्ण समर्पण के साथ परमात्मा की शरण में जाने पर जीवन की मुक्‍त‌ि का मार्ग दिखाया गया है। श्रीमद‍्भगवद‍्गीता में आचार की पवित्रता, पाखंड का त्याग, सच्ची निष्‍ठा, फल की इच्छा न रखते हुए कर्तव्य-पालन तथा अहंकार का त्याग कर उत्कृष्‍ट नैतिक मूल्यों के अनुपालन का निर्देश दिया गया है। श्री देवमुनि शुक्ल ने सरस और प्रवाहमय भाषा में इसका पद्यानुवाद करके इसे ‘जीवन-गीता’ का रूप दिया है। आशा है, सुधी पाठक गीता को पद्य रूप में हृदयंगम कर इसके आदर्श गुणों को अपनाकर अपने उद्धार का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

Lokpriya Aadivasi Kahaniyan by Vandna Tete

SKU: 9789351868767
आदिवासियों का ‘कहना’ बिखरा हुआ है, बेचारगी और क्रांति, ये दो ही स्थितियाँ हैं, जिसकी परिधि में लोग आदिवासियों के ‘कहन’ को देखते हैं। चूँकि गैर-आदिवासी समाज में उनका बड़ा तबका, जो भूमिहीन और अन्य संसाधनों से स्वामित्व विहीन है, ‘बेचारा’ है, इसलिए वे सोच भी नहीं पाते कि इससे इतर आदिवासी समाज, जिसके पास संपत्ति की कोई निजी अवधारणा नहीं है, वह बेचारा नहीं है। वे समझ ही नहीं पाते कि उसका नकार ‘क्रांति (सत्ता) के लिए किया जानेवाला प्रतिकार’ नहीं बल्कि समष्टि के बचाव और सहअस्तित्व के लिए है। जो सृष्टि ने उसे इस विश्वास के साथ दिया है कि वह उसका संरक्षक है, स्वामी नहीं। इस संग्रह की कहानियाँ आदिवासी दर्शन के इस मूल सरोकार को पूरी सहजता के साथ रखती हैं। क्रांति का बिना कोई शोर किए, बगैर उन प्रचलित मुहावरों के जो स्थापित हिंदी साहित्य व विश्व साहित्य के ‘अलंकार’ और प्राण तत्त्व’ हैं। एलिस एक्का, राम दयाल मुंडा, वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’, मंगल सिंह मुंडा, प्यारा केरकेट्टा, कृष्ण चंद्र टुडू, नारायण, येसे दरजे थोंगशी, लक्ष्मण गायकवाड़, रोज केरकेट्टा, पीटर पौल एक्का, फांसिस्का कुजूर, ज्योति लकड़ा, सिकरा दास तिर्की, रूपलाल बेदिया, कृष्ण मोहन सिंह मुंडा, राजेंद्र मुंडा, जनार्दन गोंड, सुंदर मनोज हेम्ब्रम, तेमसुला आओ, गंगा सहाय मीणा और शिशिर टुडू की कहानियाँ।

The Circus, and Other Essays and Fugitive Pieces by Joyce Kilmer

SKU: 9788184307111
There are, however, some facts in explanation of the appearance of this volume at this time which require to be set down. And a number of circumstances in relation to the material here collected may be told, I think, to general interest. With these matters I am probably as familiar as anyone, and so have the great privilege of undertaking to record them. The ten highly humorous and altogether charming essays which form the first part of this volume have led a rather queer life so far—though I think their existence will be a very happy one from now on. First, they were not "essays" at the time of their birth. They came into the world as "articles." So they were spoken of by the young journalist who at various times and with very little to do about the matter wrote them in the course of a bewildering variety of other activities. Or, to be still more frank, he was perhaps more apt to refer to them, when he did refer to them at all, as "Sunday stories," done as a part of his job with the New York Times Sunday Magazine. What they were called, however, is neither here nor there. The thing is that they are here. —from this book

Pauranik Bal Kathayen by Mukesh Nadan

SKU: 9789380183046
हिंदुधर्म में वेद-पुराणों का बहुत महत्व है। इन्हीं वेद-पुराणों में ऋषियों महापुरुषों तथा देवी-देवाओं की अनेक कथाएँ पढ़ने व सुनने को मिलती है। इन्हीं से हमें अपनी संस्कृति तथा पूर्वजों के इतिहास का ज्ञान भी मिलता है। वेद-पुराणों की ऐसी ही अनेक बाल कथाओं को हमने इस पुस्तक मे संगृहीत करने का प्रसास किया है, जो हमारे मनोरंजन के साथ-साथ बुद्धि के विकास में भी सहायक होंगी।

Pamela, Volume II  by Samuel Richardson

SKU: 9788184306335
First published in the year 1740, the present epistolary novel 'Pamela, Volume II' was written by English writer Samuel Richardson. It tells the story of a beautiful 15-year-old maidservant named Pamela Andrews, whose country landowner master, Mr. B, makes unwanted advances towards her after the death of his mother. After Mr. B attempts unsuccessfully to seduce and rape her, he eventually rewards her virtue when he sincerely proposes an equitable marriage to her. In the novel's second part, Pamela marries Mr. B and tries to acclimatize to upper-class society.

The Fiddlers by Arthur Mee

SKU: 9788184305414
A book written by American writer, journalist and educator Arthur Mee in early 20th century, 'The Fiddlers' questions people's consciousness on many major issues that were of concern in America at that point of time. These are short and long notes and articles written by the author on each of those issues and, asked the general public to awaken their morality and stop fiddling for basic necessities.

Bogi Number 2003 by Harish Naval

SKU: 9789387968820
‘बोगी नंबर 2003’ इतिहास का वह हिस्सा है जहाँ संस्कृति, शिक्षा, जन सेवाएँ, राजनीति और समाज केविभिन्न वर्गों के कालापन से उपजी विसंगतियाँ, विडंबनाएँ और विद्रूपताएँ इस उपन्यास में रोचकतापूर्ण मनोरंजन सहित ढली हैं। इस व्यंग्य-उपन्यास में की पीढ़ी उस राजनीतिक काल की पीढ़ी है, जब देश के नियामक रक्षक से भक्षक बनने लगे थे। बहुत से राजनेता धन जमा करने की होड़ में जुटने लगे थे और भ्रष्टाचार जीवन का मूलमंत्र बनने लगा था। ‘काले धन की बैसाखी’ शासन-कर्ताओं को अनिवार्य लगने लगी थी। इन्हीं भ्रष्ट जन का अनुकरण जीवन का व्यवहार बनने लगा था, जिससे बेईमानी का कद बढ़ रहा था। इसके अतिरिक्त इस पीढ़ी पर फिल्मों का प्रभाव बेहद रहा। विवेकानंद, स्वामी दयानंद, सुभाष, भगतसिंह, चंद्रशेखर से कहीं अधिक यह पीढ़ी फिल्मी सितारों को चाहने लगी। महात्मा गांधी तो केवल दो अक्तूबर तक सीमित रह गए, गांधी के नाम पर लूट-खसोट करनेवालों को देख यह पीढ़ी उनकी तरह तुरंत अमीर होना और अय्याशी परस्ती पसंद करने लगी थी। प्रस्तुत कृति में इसका विशद चित्रण आप प्रत्यक्ष भी और परोक्ष भी पाएँगे।

Zindagi by Sanjay Sinha

SKU: 9789351864783
जिस पहली महिला ने मुझे अपनी ओर आकर्षित किया था, वो मेरी माँ ही थी। मैं माँ को कभी खुद से दूर नहीं होने देना चाहता था, इसलिए मैंने चारपाँच साल की उम्र में माँ से कहा था कि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ। माँ हँस पड़ी थी, कहने लगी कि मैं तुम्हारे लिए परीलोक की राजकुमारी लाऊँगी। मैं कह रहा था कि माँ, तुमसे सुंदर कोई और हो ही नहीं सकती। मृत्यु से एक रात पहले माँ ने मुझे बताया था कि वो कल चली जाएगी। मैंने माँ से पूछा था, तुम चली जाओगी, फिर मैं अकेला कैसे रहूँगा। माँ ने कहा था, मैं तुम्हारे आसपास रहूँगी। हर पल। कहते हैं रामकृष्ण परमहंस को पत्नी में माँ दिखने लगी थी। एक औरत में माँ का दिखना ही चेतना का सबसे बड़ा सागर होता है। संसार की हर औरत को इस बात के लिए गौरवान्वित होने का हक है कि वो माँ बन सकती है। उसके पास अपने भीतर से एक मनुष्य को जन्म देने का माद्दा है। उसे बहुधा इस काम के लिए किसी पुरुष की भी दरकार नहीं। शादी के बाद जो भी मेरी पत्नी से मिला, सबने कहा ये तुम्हारी माँ का पुनर्जन्म है। विरोधाभासों और कल्पनाओं के अथाह समंदर का नाम जिंदगी है।

Naya Bharat, Samarth Bharat by Dr. Vedprakash

SKU: 9789386871886
‘नया भारत, समर्थ भारत’ संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ता भारत है, जिसमें स्वच्छता, स्वास्थ्य, गरीबी, भ्रष्टाचार, ग्रामोदय, नारी सशक्तीकरण, कुपोषण, कृषि तथा किसान की दशा, विविध आयामी सद्भाव तथा बुनियादी ढाँचा आदि अनेक ऐसे अहम मुद्दे हैं, जिन पर स्वतंत्रता के बाद सत्ता सँभालने वालों को गंभीरता से काम करना चाहिए था, लेकिन राजनीतिक हित तथा निहित स्वार्थों के चलते इन सामाजिक तथा राष्ट्रीय हितों को हाशिए पर रखा गया। ‘संकल्प’ शक्ति के अभाव में उक्त मुद्दे गंभीर चुनौती बनते चले गए। सन् 2014 में त्रस्त जनता ने भारी जनादेश देकर भाजपा को विजयी बनाया। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई उम्मीदें जगीं। 15 अगस्त, 2014 को लालकिले की प्राचीर से अपने पहले ही संबोधन में उन्होंने प्रधान सेवक बनकर उपर्युक्त मुद्दों को गंभीरता से उठाते हुए उनके समाधान का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने निराशा तथा नकारात्मकता में डूबे जन-जन को झकझोरा, भागीदारी का आह्वान किया तथा संकल्पबद्ध होकर कार्य करने का विश्वास जगाया। जन-जन की भागीदारी से राष्ट्रहित में अनेक बड़े और कड़े फैसले लेते हुए वे आगे बढ़ते रहे। लक्ष्य स्पष्ट था—‘सबका साथ, सबका विकास’। ‘साफ नीयत’ से लिये गए संकल्प अब सिद्धि की ओर बढ़ रहे हैं। ‘नए भारत’ की व्यावहारिक संकल्पना की प्रेरक प्रस्तुति है यह कृति ‘नया भारत, समर्थ भारत’।

Personal Recollections of Joan of Arc — Volume 1 by Mark Twain

SKU: 9788184306143
The present novel 'Personal Recollections of Joan of Arc — Volume 1' was written by the famous English author Mark Twain. This novel recounts the life of Joan of Arc. It was first published in the year 1896.

Sarvottam Jeevan Ka Nirman Karen by L Louise Hay

SKU: 9789350487921
यदि कार्यस्थल पर किसी व्यक्ति के साथ आपकी तनातनी चल रही है तो तुम उस स्थिति को बदलने के लिए अपने दिमाग का इस्तेमाल करो। जब भी उनका खयाल आपके दिमाग में आए, विशेष तौर पर उस व्यक्ति का, जिसके साथ आपको समस्या है, तो उस व्यक्ति की कमियों की बजाय खूबियों पर अपना ध्यान केंद्रित करें। आपको आश्चर्य होगा कि किस प्रकार से आपके संबंधों में सुधार आता है। हालाँकि हर व्यक्ति यही सोचता है कि धनी होने से ही वह खुश हो सकता है, ऐसा नहीं है, खुशियों का केंद्रबिंदु यह नहीं होता। यदि आप अपने आपसे प्यार नहीं करना जानते, यदि आप अपने आपको माफ करना नहीं सीखे, यदि आप आभार प्रकट करना नहीं जानते तो पैसा आपकी कोई मदद नहीं करेगा। पैसे से आप केवल अपना गुस्सा निकालने और उनपर चिल्लाने के लिए नौकरों की फौज खड़ी कर सकते हैं। —इसी पुस्तक से विश्वविख्यात सेल्फ हेल्प एक्सपर्ट लुइस एल. हे ने अपने अनुभवों से यह बताया है कि जीवन में सकारात्मकता ही सफलता की कुंजी है। इस पुस्तक में उन्होंने बहुत व्यावहारिक सूत्र दिए हैं, जिनका अनुसरण कर हम एक सर्वश्रेष्ठ जीवन बिता सकते हैं। सफल और सुखी जीवन जीने की एक प्रैक्टिकल हैंडबुक।

Mission Kashmir by S.K. Sinha

SKU: 9788173158698
मिशन कश्मीर—ले.जन. एस.के. सिन्हा असम के बाद वर्ष 2003 में ले.जन. एस.के. सिन्हा जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल नुयक्त हुए। अपने छह वर्ष के कार्यकाल के दौरान कश्मीर समस्या के समाधान हेतु उन्होंने अपनी क्षमता और व्यापक अनुभव के बल पर क्या कुछ किया, प्रस्तुत पुस्तक में इसका विस्तृत वर्णन है। आतंकवाद के चलते जम्मू एवं कश्मीर में भारत की अखंडता और प्रभुसत्ता की रक्षा करना चुनौतीपूर्ण कार्य था, अभी भी है। अपने कार्यकाल के दौरान किस तरह लेखक ने इन चुनौतियों का सामना किया, वहाँ के लोगों को विश्वास में लिया, यह एक लंबी कहानी है। उन्होनें यहाँ की राजनीति में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी। राज्य के कई मुख्यमंत्रियों से उनका आमना-सामना हुआ। लेखक ने इनके साथ अपने संबंधों, सहयोग और विरोधाभासों का खुलकर उल्लेख किया है। धार्मिक, ऐतिहासिक, सैन्य, आर्थिक और जातीय—कश्मीर समस्या के इन विभिन्न आयामों के बीच वहाँ एक सौहार्दपूर्ण वातावरण तैयार करना बेहद टेढ़ी खीर था। ऐसी स्थिति में उन्होंने कश्मीर में विद्रोह, आतंकवाद और छद्म युद्ध के दुष्चक्र को समझा और जाना कि धार्मिक कट्टरता ही यहाँ उग्रवाद की मुख्य जड़ है। उन्होंने लोगों को राष्ट्र की मुख्यधारा में लाने का सार्थक प्रयास किया। उनके प्रयास से ही यहाँ कश्मीरियत को बल मिला। कश्मीर समस्या की वास्तविक सच्चाई और राज्य के सुरक्षा परिदृश्यों की जानकारी देती विचारप्रधान पुस्तक यह स्थापित करती है कि निस्संदेह कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, और हमेशा रहेगा।

Nlp Dwara 100% Atmavishwas Aur Safalta by Ashok Gupta

SKU: 9789382901525
‘एन.एल.पी.’ (NLP) लगभग सभी क्षेत्रों में सफलता, मानसिक स्वास्थ्य, बहुआयामी आत्मोन्नति, व्यक्‍त‌ित्व विकास, बहूपयोगी संवादकला एवं रोगमुक्‍त‌ि के लिए पूर्णत: व्यावहारिक सर्वाधुनिक पद्धति है। इसका संस्थापन यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, अमेरिका के गेस्टाल्ट थेरैपिस्ट जान ग्रिंडर और रिचर्ड बैंडलर ने दशकों विश्‍व के अग्रणी विभूतियों पर गहन शोध के पश्‍चात् किया। यह प्रोफेशन, खेल, शिक्षा, व्यापार, मैनेजमेंट, चिकित्सा, हिप्नोथेरैपी, मनोविज्ञान, मनोचिकित्सा आदि में भी उच्चकोटि का सामर्थ्य व पीक परफॉर्मेंस प्रदान करने में प्रभावी है। जीवन उत्तम बनाने में सहायक एवं अनन्य विविधता और गहराई छिपाए ‘एन.एल.पी.’ मानव इतिहास में पहला ऐसा विज्ञान है, जो अति शीघ्रता तथा कम समय में विश्व की विशाल जनसंख्या में अत्यंत लोकप्रिय बना। मनोविज्ञान की सबसे लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘साइकोलॉजी टुडे’ के अनुसार ‘एन.एल.पी.’ (NLP) में जीवन परिवर्तन हेतु वर्तमान में सबसे सक्षम तकनीक होने की संभावना है। संपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य के बल पर जीवन में सर्वश्रेष्ठ करने की क्षमता विकसित करनेवाली, हर व्यक्‍त‌ि के लिए उपयोगी एक प्रैक्टिकल हैंडबुक।

Thakkar Bapa by Sweta Parmar ‘Nikki’

SKU: 9789389471045
‘ठक्कर बापा’ अद्भुत व्यक्तित्व के स्वामी थे। लोगों का कहना था कि वे अपने आप में एक संस्था थे। वे जिस युग में थे, वहाँ समाज के दुर्बल अंग की उपेक्षा की जा रही थी; तब बापा ने दलितों और पिछड़े वर्ग को साथ लेकर प्रगति का रास्ता पकड़ा। उनकी अडिग लोक-सेवा ने हर दीन-दुःखी और गरीब को सम्मान दिया और उन्हें सबका बापा बना दिया। राष्ट्रपिता बापू भी उन्हें बापा ही कहा करते थे। अपने जीवन के अंतिम क्षण तक जिस अपूर्व निष्ठा, अनन्य भक्ति व अथक परिश्रम से उन्होंने अपना सेवा-व्रत निभाया, वह निस्संदेह बेजोड़ कहा जा सकता है। बापा विनम्रता और सरलता की मूरत थे; जब काका कालेलकर ने उनसे लेखन के लिए कहा तो वे बोले, ‘‘मेरे जीवन में ऐसा कुछ नहीं है, जो लिखने लायक हो।’’ उन्हें भाषण देना नहीं आता था और न ही वे साहित्यिक भाषा में लेख लिखते थे, बस उन्हें डायरी लिखने का शौक था। मानवता को सबसे बड़ा धर्म मानकर शोषित-उपेक्षितों के कल्याण और सुख के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करनेवाले सेवाव्रती कर्मयोगी ठक्कर बापा की प्रेरक-पठनीय जीवनी है यह पुस्तक।

Kalpit Kathayen by Dr. Rekha Dwivedi

SKU: 9789387980693
इस पुस्तक की असली हकदार तारावती की किसी ने हत्या कर दी। उसका हत्यारा पकड़ा भी नहीं गया। जब यह बात मुझे पता चली तो कई रातों तक मैं सो नहीं पाई। आज भी इस पुस्तक पर कार्य करते-करते मुझे तारावती की मीठी और अपने ही अंदाज में कहानी कहती आवाज बार-बार सुनाई पड़ती है। तारावती को ढेरों कहानियाँ याद थीं। एक यात्रा के दौरान रात में वह कथाएँ सुना रही थी और मैं अपने फोन में उन्हें रिकॉर्ड करती जा रही थी। यह बात शायद तारा को क्या, तब मुझे भी पता नहीं थी कि मैं इन्हें प्रकाशित करवाऊँगी; परंतु तारावती के गुजरने के बाद मेरे लिए इन कहानियों को प्रकाशित करवाना बेहद महत्त्वपूर्ण हो गया, क्योंकि मुझे लग रहा है कि शायद वह इन कथाओं में ही थोड़ी जीवित रह जाएगी। वह जितनी अच्छी कथावाचक थी, उतनी ही अच्छी गायिका भी। वह ढोलक पर गीत भी खूब गाती थी। यह पुस्तक तारावती को ही समर्पित है।

Bharat Mein Paryatan by Rajesh Kumar Vyas

SKU: 8188140953
हमारे देश में जितनी विविधता है, उतनी विश्व के किसी भी अन्य देश में नहीं है। हिमाच्छादित पहाड़ियाँ, हिमखंड, गरम जल के फव्वारे, गुफाएँ, सम्मोहित करनेवाली झीलें, दूर तक पसरा रेगिस्तान, समुद्र तट, खान-पान, रहन-सहन, त्योहारों के आकर्षण आदि के बारे में जितना कहा जाए उतना ही कम है। यही वह देश है जहाँ सभी रुचियों के पर्यटकों के लिए वैविध्यपूर्ण छटा के पर्यटन स्थल हैं। यही नहीं, पर्यटन के लिहाज से भारत को एकमात्र ऐसा देश भी कहा जा सकता है जिसमें पर्यटक दूसरे देशों के मुकाबले सिर्फ एक तिहाई या इससे भी कम खर्च पर घूमने-फिरने का आनंद उठा सकते हैं। तेजी से फैल रहे एशियाई बाजारों को देखते हुए भारत के लिए पर्यटन के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भागीदारी निभाने का यही सही समय है। इस दायित्व की पूर्ति के लिए आवश्यक है पर्यटन शिक्षा। पर्यटन शिक्षा की भी उपादेयता यही है कि इसके जरिए राष्ट्रें में बेहतर पर्यटन वातावरण निर्मित किया जा सके। ऐसा यदि होता है तो पर्यटन के जरिए आतंकवाद, हिंसा, आंदोलन, जातिवाद जैसी समस्याओं से स्वत: ही निजात पाई जा सकती है। पर्यटन परस्पर सौहार्द और जीवन स्तर को उत्कर्ष पर ले जाने का बेहतरीन माध्यम बन सकता है ÖæÚUÌ ×ð´ ÂØüÅUÙ में पर्यटन के सैद्धांतिक पक्ष को व्यावहारिक अनुभवों के साथ प्रस्तुत किया गया है। विश्वास है विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमें, पर्यटन संगठनों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं को ध्यान में रखकर लिखी गई यह पुस्तक पर्यटन प्राध्यापकों, पर्यटन उद्योग में नियोजित व्यक्तियों, पर्यटकों तथा विद्यार्थियों के लिए समान रूप से लाभकारी सिद्ध होगी।